📖 थिंक फॉर योरसेल्फ: रेस्टोरिंग कॉमन सेन्स इन एन ऐज ऑफ एक्स्पर्ट्स एण्ड आर्टिफिसियल इन्टेलिजन्स - विक्रम मनशरामानी (Hindi Book Summary - किताब का सारांश)
प्रस्तावना - एक ऐसी दुनिया जिसने अपने निर्णय लेने का काम बाहरी एजेंसियों को सौंप दिया हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ विशेषज्ञता प्रचुर मात्रा में है, डेटा का अंबार लगा हुआ है, और एल्गोरिदम चुपचाप हमारे विकल्पों को आकार दे रहे हैं। फिर भी, विरोधाभास यह है कि स्वतंत्र रूप से सोचने की हमारी क्षमता कम होती जा रही है। मनशरामानी ने डलास में इबोला के गलत निदान से लेकर जीपीएस का अंधाधुंध अनुसरण करते हुए झीलों में जाने वाले लोगों तक, कई परेशान करने वाले उदाहरणों के साथ पुस्तक की शुरुआत की है, ताकि एक सरल लेकिन गहन सत्य को स्पष्ट किया जा सके: हमने अनजाने में ही अपनी सोच को विशेषज्ञों, प्रणालियों और मशीनों को सौंप दिया है। प्रस्तावना इस बात की पृष्ठभूमि तैयार करती है कि हमने अपनी संज्ञानात्मक स्वायत्तता कैसे खो दी, यह क्यों मायने रखती है, और हम इसे कैसे पुनः प्राप्त कर सकते हैं। अध्याय 1 - विशेषज्ञता का अत्याचार मनशरामानी एक सांस्कृतिक जुनून, यानी विशेषज्ञता का निदान करके शुरुआत करते हैं । आधुनिक समाज विशेषज्ञों की पूजा करता है - हृदय रोग विशेषज्ञ, मात्रात्मक विशेषज्ञ, महामारी विशेष...